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लेखनी कहानी -12-Jan-2026

वो जफा जो हुए हैं वफ़ा करते करते वो सनम बन गए हैं खुदा करते-करते।

जुल्म और जब्र है यां तशद्दुद बहुत। क़त्ल ए मज़लूम है इल्तिज़ा करते करते।

रह गई ज़िन्दगी की नमाज़ें बहुत। सब क़ज़ा हो गई है अदा करते-करते।

दे रहा था ज़माने को उपदेश जो। खुद ब खुद खो गया है कथा कहते कहते।

एक चिंगारी लग जाए जो आजकल लोग थकते नहीं हैं हवा करते करते।

पुलिस और मुजरिम अदालत अजब लोग मर जाते हैं मुकदमा करते करते।

फैसले के लिए मुंतज़िर पीढ़ियां। खुद सुलह लेते कर फैसला करते करते।

क्यों "सगीर" अब इबादत हुई रायगां। अब तो हम थक चुके हैं दुआ करते करते।

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1 Comments

Pranav kayande

17-Jan-2026 01:14 PM

Great

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